देश की 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनें, किसानों और ग्रामीण मजदूर संगठनों के साथ मिलकर राष्ट्रव्यापी हड़ताल कर रही हैं। सरकार की नीतियों को कॉर्पोरेट परस्त और मजदूर-किसान विरोधी बताते हुए यह संगठन सड़कों पर उतरने को तैयार हैं।
बंद का असर बैंकिंग से लेकर परिवहन, कोयला खनन, डाक विभाग और सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों तक दिखेगा। NMDC, स्टील और मिनरल क्षेत्र की कंपनियों के कर्मचारियों ने भी समर्थन जताया है। आयोजकों का दावा है कि 25 करोड़ से ज़्यादा मज़दूर, जिनमें औपचारिक और अनौपचारिक क्षेत्र दोनों के लोग शामिल होंगे, इस बंद में भाग लेंगे।
हालांकि बैंक यूनियनों की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, फिर भी आयोजकों ने संकेत दिए हैं कि बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं — यानी चेक क्लीयरेंस, शाखा सेवा, और ग्राहक सहायता ठप रह सकती है।
भारत बंद का यह आह्वान सिर्फ हड़ताल नहीं, सरकार को चेतावनी है — मजदूर और किसान अब चुप नहीं बैठेंगे!
09 जुलाई को भारत बंद तय! यूनियनों और किसानों का संयुक्त विरोध प्रदर्शन

