पिथौरागढ़ | सोर समाचार
उत्तराखंड पुलिस में महानिरीक्षक (IG) जैसे उच्च पद से सेवानिवृत्त होने के बाद श्रीमती विमला गुंज्याल ने समाज सेवा की एक ऐसी मिसाल पेश की है, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देगी। उन्होंने अपने पैतृक गांव गुंजी (विकासखंड धारचूला, जनपद पिथौरागढ़) में निर्विरोध ग्राम प्रधान बनकर यह साबित कर दिया कि असली नेतृत्व पद से नहीं, जनसमर्पण और विश्वास से आता है।
कैसे बनीं निर्विरोध प्रधान?
गुंजी गांव में ग्राम प्रधान पद के लिए कुल चार लोगों ने नामांकन पत्र खरीदे थे। लेकिन जैसे ही ग्रामीणों को ज्ञात हुआ कि सेवानिवृत्त IG विमला गुंज्याल प्रधान पद के लिए आ रही हैं, पूरा गांव एकजुट हो गया। पूर्व सरपंच लक्ष्मी गुंज्याल और वरिष्ठ ग्रामीणों की अगुवाई में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि विमला जी को ही प्रधान चुना जाएगा। बाकी सभी दावेदारों ने अपने नाम वापस ले लिए। यह न सिर्फ गांव की एकता का प्रतीक था, बल्कि बिमला जी के प्रति सम्मान और विश्वास का भी उदाहरण।

जनसेवा का संकल्प
सेना से लेकर पुलिस तक, विमला गुंज्याल का जीवन अनुशासन, समर्पण और नेतृत्व का पर्याय रहा है। अब वे अपने गांव के विकास, सीमावर्ती क्षेत्र की सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करेंगी। सीमांत और “वाइब्रेंट विलेज” घोषित गुंजी गांव के लिए यह एक स्वर्णिम अवसर है।
समाज को संदेश
बिमला गुंज्याल का यह निर्णय यह भी दर्शाता है कि सेवा किसी पद से नहीं, सोच और संकल्प से होती है। उनका निर्विरोध चुना जाना यह सिद्ध करता है कि जनविश्वास केवल भाषणों से नहीं, बल्कि जीवन भर के समर्पण से अर्जित होता है।
राज्य की हर बेटी उनके पदचिन्हों पर चले — यही समाज के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा है।

