कुमाऊँनी गोष्ठी में ‘भिटोली’ पर मंथन, परंपरा के बदलते स्वरूप पर चर्चा

पिथौरागढ़ | सोर समाचार

आदलि कुशलि कुमाऊँनी मासिक पत्रिका के तत्वावधान में शहर के एक प्रतिष्ठान में मासिक गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें इस माह का विषय “लोक परम्परा भिटोली का बदलता स्वरूप” रहा।
कार्यक्रम का संचालन अनीता जोशी ने किया, जबकि अध्यक्षता दिनेश पंत ने की। विचार एवं काव्य गोष्ठी में वक्ताओं ने भिटोली परंपरा के सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व पर विस्तार से चर्चा की।
वक्ताओं ने कहा कि भिटोली कुमाऊँ की एक महत्वपूर्ण लोक परंपरा है, जो विवाहित बेटियों को उनके मायके से जोड़ने के साथ-साथ समाज में रिश्तों और आपसी मेल-जोल को मजबूत बनाती है। उन्होंने बताया कि समय के साथ इसके स्वरूप में बदलाव जरूर आया है, लेकिन इसका मूल उद्देश्य आज भी कायम है।
वर्तमान दौर में इस परंपरा को संरक्षित और विस्तारित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
गोष्ठी में डॉ. दीप चौधरी, पुष्कर सिंह खयायत, डॉ. आनंदी जोशी, मुन्नी पांडे, चिंतामणि जोशी, घनश्याम जोशी, लक्ष्मी आर्या, उमा पाटनी, हेमराज मेहता, जितेंद्र तिवारी और रोहित यादव सहित कई साहित्यकार मौजूद रहे।
इस प्रकार की गोष्ठियाँ लोक संस्कृति और परंपराओं को जीवित रखने में अहम भूमिका निभा रही हैं।

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