पिथौरागढ़, 29 अप्रैल 2025:
कश्मीर घाटी से एक बार फिर पिथौरागढ़ के एक जांबाज सपूत ने अपने प्राणों की आहुति दी है।
चार कुमाऊं रेजीमेंट में कार्यरत सिपाही देवेंद्र सिंह बसेड़ा, निवासी बिण (मूल निवासी: लखती गांव, डीडीहाट) की श्रीनगर ट्रांजिट कैंप में दो दिन पूर्व एक दुर्घटना में मौत हो गई थी।

उनका पार्थिव शरीर आज तीन दिन बाद उनके गांव बिण पहुंचा, जहां हजारों लोगों ने नम आंखों से अंतिम विदाई दी। भारत माता की जयकारों के बीच सैन्य सम्मान के साथ अंतिम यात्रा निकाली गई। स्थानीय अलाइमल घाट पर सेना के जवानों ने उन्हें अंतिम सलामी दी।
यह खबर और भी ज्यादा हृदय विदारक इसीलिए रही क्योंकि देवेंद्र सिंह अभी 6 दिन पहले ही छुट्टी से ड्यूटी पर लौटे थे। उनकी शादी को महज दो साल हुए थे और उनका एक 7 महीने का मासूम बच्चा भी है।
शहीद के पिता भी सेवानिवृत्त सैनिक हैं, जिन्होंने अपने बेटे को खोने का दर्द झेला। इस मौके पर पूर्व सैनिक संगठन ने उन्हें ढाढस बंधाया।
तीन दिन की देरी पर उठे सवाल
पूर्व सैनिक संगठन और स्थानीय नागरिकों ने पार्थिव शरीर को ज़िले तक लाने में हुई तीन दिन की देरी पर नाराज़गी जाहिर की।
उनका कहना है कि देश के लिए बलिदान देने वाले जवानों के पार्थिव शरीर को हवाई मार्ग से शीघ्र लाया जाना चाहिए।
पूर्व सैनिकों ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि :-
“सैनिकों के नाम पर वोट तो मांगे जाते हैं, लेकिन शहीदों के सम्मान पर कभी अमल नहीं होता। सीमांत जनपद पिथौरागढ़ के सैनिकों को आज भी उपेक्षित महसूस होता है।”

