वन पंचायतों को सशक्त करने के लिए चम्पावत में विशेष प्रशिक्षण सम्पन्न

पिथौरागढ़ | सोर समाचार

जन–सहभागिता आधारित वन प्रबंधन को मजबूत बनाने की दिशा में चम्पावत वन प्रभाग द्वारा आज वन चेतना केन्द्र चम्पावत में वन पंचायत सरपंचों और सदस्यों के लिए एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में वन पंचायतों के अधिकार, कर्तव्यों, वन संरक्षण और आधुनिक चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा की गई।

प्रमुख वन संरक्षक कार्यालय, देहरादून से आए विशेषज्ञ डॉ. डी. के. जोशी ने उत्तराखंड की वन पंचायत परंपरा, इसकी सामाजिक-आर्थिक उपयोगिता और जलवायु परिवर्तन व मानव–वन्यजीव संघर्ष जैसे मौजूदा मुद्दों पर सामुदायिक भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने वन पंचायत नियमावली 2005, संशोधन 2024 के प्रमुख बिंदुओं को समझाते हुए बताया कि अद्यतन प्रावधान पंचायतों को अधिक पारदर्शी व जवाबदेह बनाते हैं।

कार्यक्रम में माइक्रो प्लान की उपयोगिता पर भी विस्तृत प्रस्तुति दी गई, जिसे ग्राम/वन पंचायतों के लिए वार्षिक लक्ष्यों—जैसे वन संरक्षण, चारागाह प्रबंधन, वनाग्नि रोकथाम और आजीविका उन्नयन—का आधार बताया गया।

वन क्षेत्राधिकारी श्री बृज मोहन टम्टा ने कहा कि चम्पावत क्षेत्र में वनाग्नि, अवैध कटान और मानव–वन्यजीव संघर्ष जैसी चुनौतियों से निपटने में ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी बेहद आवश्यक है। उन्होंने आग सीजन 2025–26 से पहले सभी पंचायतों को अपनी वनाग्नि रोकथाम रणनीति तैयार करने की अपील की।

इस दौरान विभागीय अधिकारियों और विशेषज्ञों ने उपस्थित सरपंचों व सदस्यों को वन संरक्षण, संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता और अवैध गतिविधियों की सूचना त्वरित देने के लिए प्रेरित किया।

अंत में, प्रतिनिधियों ने अपने क्षेत्रों में वन संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता को प्राथमिकता देने का सामूहिक संकल्प लिया। चम्पावत रेंज द्वारा आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम वन पंचायतों की क्षमता वृद्धि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *